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Sunday, June 6, 2010

अनुसन्धान और अध्ययन - भाग २

जब किसी को अनुभव होगा तो मुझे जैसा हुआ, वैसा ही होगा - चाहे समाधि-संयम विधि से हो, या अध्ययन-विधि से हो। इसी आधार पर "समझदारी में समानता" की बात मैंने सोचा। मैं जो समझा हूँ, और जैसे जीता हूँ - इसको समझ कर आप मुझसे कम नहीं, मुझसे ज्यादा अच्छे ही जियोगे। आगे की पीढी आगे! ऐसा आपके साथ ही होगा, दूसरे के साथ नहीं - ऐसा नहीं है। सबके साथ ऐसा ही है! एक अपंग व्यक्ति के साथ भी यही स्थिति है। इसी लिए, इस बात के लोकव्यापीकरण की तृषा में हम अभी काम कर रहे हैं।

प्रश्न: अनुभव के बाद क्या और कुछ जानने को शेष रहता है?

उत्तर: नहीं। अनुभव के बाद समझने को "नया" कुछ शेष नहीं रहता।

प्रश्न: क्या अनुभव के बाद, उदाहरण के लिए, शरीर को स्वस्थ रखने के बारे में जो मैं जानना चाहता हूँ, वह भी प्राप्त हो जाएगा?

उत्तर: नहीं। वह कला है, जो "सीखने" की वस्तु है। कला अनुभव की वस्तु नहीं है। कला कर्तव्यों और दायित्वों को पूरा करने के अर्थ में है। सीखने में प्रयोग करना पड़ेगा। रासायनिक-भौतिक संसार संबंधी सभी ज्ञान-अर्जन के लिए प्रयोग आवश्यक है। कर्म-अभ्यास उसी का नाम है, जिसके अनेक आयाम हैं। उदाहरण के लिए - गाय की सेवा करना कर्म-अभ्यास है, कृषि करना कर्म-अभ्यास है, औषधियों को पहचानना और बनाना कर्म-अभ्यास है। अनुभव के बाद हर कला को जल्दी सीखा जा सकता है।

प्रश्न: अनुभव पूर्वक जल्दी कैसे सीखा जा सकता है?

उत्तर: अनुभव की रोशनी में जल्दी सीखा जाता है, क्योंकि हमारा मन फंसा नहीं रहता। भय-प्रलोभन या सुविधा-संग्रह में मन फंसा नहीं रहता, इस कारण अनुभव पूर्वक जल्दी सीखा जाता है।

कर्म-अभ्यास को अनुभव से न जोड़ा जाए! कर्म-अभ्यास पुरुषार्थ की सीमा में है। मैंने अनुभव किया है, पर मैं सभी आयामों में कर्म-अभ्यास संपन्न हूँ - ऐसा नहीं है। मैं जिन आयामों में कर्म-अभ्यास करना चाहता हूँ, वह कर सकता हूँ - ऐसा अधिकार बना है। कल्पनाशीलता और कर्म-स्वतंत्रता के आधार पर यह अधिकार बना है।

- बाबा श्री नागराज शर्मा के साथ संवाद पर आधारित (अप्रैल २०१०, अमरकंटक)

आभार - प्रवीण, आतिशी, अशोक।

2 comments:

Gopal Bairwa said...

Rakesh,

Thanks for putting this post. . Here Baba has clearly indicated what skills are. Even a highly skilled person may not have wisdom, which is what we witness in most of the world today. There are many skilled people, but they dont necessarily have the wisdom to live. There are plenty of examples we see in media every day.

Best,
Gopal.

Rakesh Gupta said...

That's absolutely correct! :)

Skills, Arts, and Wisdom are three dimensions of knowledge. Of which Skills and Arts can be learned even within the purview of animal-consciousness. However, in the absence of Wisdom - Skills and Arts are purposeless. With Wisdom - Skills and Arts get devoted to realization of duties and responsibilities in relationships.

All technology, arts, medicine, languages, etc can be learned through practice, innovation, and experimentation. Wisdom is attainable only through adhyayan - or meaningful education. With wisdom - technology and skills get their rightful place. In the absence of wisdom - technology or skills are purposeless and don't give fulfillment.

regards,
Rakesh.