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Thursday, March 3, 2016

न्याय और विश्वास

"मूल्यों सहित संबंधों का निर्वाह ही विश्वास और उसकी निरंतरता है.  विश्वास स्व-संतुष्टि का नित्य स्त्रोत, अमरस्त्रोत जीवन का अभीष्ट और गुणात्मक विकास का आधार है.  न्याय का साक्ष्य विश्वास एवं विश्वास का साक्ष्य न्याय है.  न्याय व विश्वास अविभाज्य वर्तमान है." - श्री ए नागराज

"Trust and its Continuity is to fulfill (duties and obligations in) one's Relations with Values.  Trust is eternal source of Contentment within self.  It is the Goal of the immortal jeevan and foundation for Qualitative Development.  Trust evidences Presence of Justice, and Justice evidences Presence of Trust.  Justice and Trust have Inseparable Presence." - Shree A. Nagraj 

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