Sunday, April 3, 2016

मानव कुल का प्रयोजन

"किसी शिक्षा संस्कार व्यवस्था के बिना भी कल्पना के रूप में अभिभावकों में संतान के प्रति अभ्युदय की कामना स्वीकृत रहती है.  इस तथ्य से स्पष्ट है कि अस्तित्व में अभ्युदय सूत्र और उसकी व्याख्या है ही, उसे मानव को नियति के रूप में स्वीकारना है.  इस तथ्य को जानने के फलस्वरूप अस्तित्व में मानव जाति का अभ्युदय के लिए प्रायोजित होना, तत्पर होना ही मानव कुल का प्रयोजन है.  ऐसा स्वीकृत होने पर ही मानव अध्ययन के लिए निष्ठा पूर्वक तत्पर होता है." - श्री ए नागराज

"Even without any provision of meaningful education, parents or guardians wish for their children's all round development in their imagination.  From this fact it is clear that all round resolution is inherent and inevitable in existence, and human beings need to accept it as their destiny.  As a result of knowing this fact, humankind's devoting themselves for accomplishing all round resolution in existence itself is their purpose.  It is only upon becoming established with this acceptance that a human being becomes earnest and dedicated for this Study." - Shree A. Nagraj

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