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Wednesday 25 April 2012

व्यवस्था का सूत्र


व्यापक वस्तु में प्रकृति की इकाइयां डूबी, भीगी और घिरी है.  व्यापक वस्तु पारगामी होने के आधार पर सभी इकाइयां इसमें भीगी है.  परमाणु-अंश भी भीगा हुआ है, इसीलिये ऊर्जा संपन्न है, इसीलिये परमाणु क्रियाशील है.  क्रिया का स्वरूप बना – श्रम, गति, परिणाम.  अकेले परमाणु-अंश में गति तो दिखता है, पर श्रम और परिणाम नहीं दिखता है.  परमाणु-अंश जब परमाणु के रूप में स्वयं-स्फूर्त विधि से गठित हो जाता है – तो श्रम-गति-परिणाम के स्वरूप में वह परमाणु एक निश्चित-आचरण को व्यक्त करता है.  दो अंश के परमाणु का आचरण भी निश्चित है.  परमाणु व्यवस्था का मूल स्वरूप है.  जो कुछ भी अस्तित्व में प्रकाशित है - वह व्यवस्था के सूत्र पर ही निर्भर है.  मानव के अस्तित्व में प्रकाशित होने का आधार व्यवस्था है.  व्यवस्था में जीने के आधार पर ही मानव समाधान-समृद्धि पूर्वक जी सकता है, फलस्वरूप आगे चलकरके अभय और सह-अस्तित्व को प्रमाणित कर पाता है.

- श्री ए. नागराज के साथ प्रवीण और अतिशी के संवाद के आधार पर (दिसम्बर २००८).

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