ANNOUNCEMENTS



Saturday, September 4, 2010

अनुक्रम से अनुभव

प्रश्न: "अनुक्रम से अनुभव होता है" - इसको समझाइये।

उत्तर: पहले - शब्द; दूसरे -शब्द का अर्थ; तीसरे - शब्द के अर्थ स्वरूप में अस्तित्व में वस्तु; चौथे - अस्तित्व में वस्तु के साथ तदाकार होना; पांचवे - अनुभव होना। इस तरह अनुभव होता है। अनुभवगामी विधि में ये पांच हैं। अनुक्रम की वस्तु है - पदार्थ-अवस्था से प्राण-अवस्था, फिर प्राण-अवस्था से जीव-अवस्था, फिर जीव-अवस्था से ज्ञान-अवस्था का प्रगटन। अनुक्रम सहज अनुभव होता है। अनुक्रम पूर्वक अनुभव होता है। ज्ञान-अवस्था अनुभव-मूलक विधि से प्रमाणित होती है।

इस प्रस्ताव को और सुगम बनाने की युक्ति मेरे पास अभी तक आया नहीं है। आप लोग इसको अनुभव करो फिर सोचो, कैसे इसको और सुगम बनाया जा सकता है!

अध्ययन प्रक्रिया में अध्ययन करने वाले और अध्यापन करने वाले दोनों की भागीदारी है। अनुभव यदि एक व्यक्ति से दूसरे में अंतरित होना है तो - अध्यापन कराने वाले में प्रामाणिकता पूरा होना चाहिए, और अध्ययन करने वाले में जिज्ञासा पूरा होना चाहिए। दोनों हुए बिना अध्ययन-प्रक्रिया सफल नहीं होगा।

- बाबा श्री नागराज शर्मा के साथ संवाद पर आधारित (जुलाई २०१०, अमरकंटक)

आभार - प्रवीण, आतिशी (मानव-स्थली, भोपाल)

No comments: