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Sunday, April 23, 2017

जब समझ रहे हो उस समय समझने पर ध्यान दो

सत्ता में सम्पृक्तता ही जीवन में ज्ञान के प्राप्त रहने का आधार  है.  ज्ञान प्रयत्न से प्राप्त नहीं होता।  ज्ञान प्राप्त रहता ही है.  ज्ञान संपन्न होने के लिए मानव को कोई प्रयत्न नहीं करना है.  प्राप्त ज्ञान में मानव को अनुभव करना है.  प्राप्त  ज्ञान को कार्य रूप में परिणित करने के लिए मानव को प्रयत्न करना होता है.  शरीर द्वारा ज्ञान को प्रमाण रूप में प्रस्तुत करने के लिए पूरा अध्ययन है.  अध्ययन ही अभ्यास या साधना है.

अध्ययन या समझना ज्ञान में अनुभव करने के लिए एक synchronization process है.  ज्ञान को अभिव्यक्त करना एक expansion process है.  समझते समय "इसको अभिव्यक्त कैसे करेंगे", इसमें आपका ध्यान रहता है तो आप कभी समझ नहीं पाएंगे।  जब समझ रहे हो उस समय समझने पर ध्यान दो, न कि दूसरों को इसे कैसे बताना है उस पर.  अध्यवसायिक विधि में रुकावट वहीं है.

समझने के लिए ध्यान देना होता है.  समझने के बाद ध्यान बना रहता है.  अध्ययन के लिए मन लगाते हैं तभी समझ में आता है.

- बाबा श्री ए नागराज के साथ संवाद पर आधारित (अछोटी, जुलाई २०११)

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