अनुभव होने के रूप में होता है या और किसी रूप में होता है? होना मतलब अस्तित्व। हवा के होने के आधार पर हवा का अनुभव है. धरती के होने के आधार पर धरती का अनुभव है. पानी के होने के आधार पर पानी का अनुभव है. होने का ही अध्ययन है, होने का ही अनुभव है. होने का अनुभव पूर्वक ही न्याय धर्म सत्य पूर्वक जीना प्रमाणित होता है.
विज्ञान ने ऐसा माना - हमको जो बर्बाद करना है, वो अध्ययन है. हमको जो बर्बाद करना है, वो प्रयोग है. इसको सुविधा-संग्रह के आधार पर विकास मान लिया। दूसरे, जो ज्यादा मार-पीट कर सके उसको ज्यादा विकसित मान लिया। और कोई आधार नहीं है. इस ढंग से जो होना था, वह हो ही चुका है.
अब यह सोचा जाए - न्याय पूर्वक जीना विकास और जागृति है. समाधान पूर्वक जीना विकास और जागृति है. सत्य पूर्वक जीना विकास और जागृति है. इसके साथ नियम, नियंत्रण, संतुलन पूर्वक जीना विकास और जागृति है. इस तरह इन 6 बिंदुओं में हम विकास और जागृति को पहचान सकते हैं. अब हमको निर्णय करना है - शोषण और मारपीट करना विकास और जागृति है या न्याय-धर्म-सत्य पूर्वक जीना विकास और जागृति है?
अस्तित्व स्वयं सहअस्तित्व है. इसी से, इसी में, इसी के लिए अध्ययन है. इसको छोड़ करके हम जो कुछ अध्ययन करते हैं वो मिथ्या हो जाता है, अपराध के लिए रास्ता बन जाता है. सहअस्तित्व को भुलावा दे कर हमने कुछ भी अध्ययन किया, तो वह अपराध की जगह में पहुँच जाता है या चुप होने की जगह में पहुँच जाता है. प्रयोग में आ जाएंगे तो अपराध करेंगे, रहस्य में फंसेंगे तो चुप हो जायेंगे। यह बात तयशुदा है.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)
No comments:
Post a Comment