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Friday, December 2, 2011

सूचना, अध्ययन, अनुभव, प्रमाण

संवाद का उद्देश्य है - सह-अस्तित्व वस्तु को देखने के लिए 'सूचना' मिल जाए.  सूचना के पठन के बाद अध्ययन के अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं है. अध्ययन के बाद अनुभव के अलावा और कोई मार्ग नहीं है.  अनुभव के बाद प्रमाण के अलावा और कोई मार्ग नहीं है.  मंजिल यही है.  अध्ययन की अवधि होती है.  अनुभव की अवधि होती है.  प्रमाण की कोई अवधि नहीं है.  अनंत तक प्रमाण है.  अध्ययन करने में, अनुभव करने में समय लगता है - चाहे छोटा से छोटा समय क्यो न हो.   प्रमाण के लिए कोई समय नहीं है.  प्रमाण निरंतर है.  दूसरे अध्ययन में  ही जो समय लगता है, वह लगता है.  अध्ययन के बाद अनुभव में नगण्य, अत्यल्प समय लगता है.  उसके बाद प्रमाण तो कभी समाप्त ही नहीं होता.

अभी तक भौतिकवादी विधि से या आदर्शवादी विधि से अध्ययन नहीं हो पाया था.  भौतिकवादी विधि में पहले पठन है, फिर प्रयोग है.   आदर्शवादी विधि में श्रवण या पठन के बाद साधना है.  साधना में मौन अंतिम बात हुई.  इस तरह भौतिकवादी या आदर्शवादी विधि से मानव के जीने में प्रमाण तक पहुँचने का रास्ता नहीं मिला.  प्रयोग कोई जीने की जगह नहीं है.  मौन कोई जीने की जगह नहीं है.

मध्यस्थ दर्शन के विकल्पात्मक विधि में है - सूचना, अध्ययन, अनुभव, फिर प्रमाण.  उपलब्धि प्रमाण ही है. 

-  श्री नागराज जी के साथ राकेश गुप्ता और श्रीराम नरसिम्हन के संवाद पर आधारित (जनवरी २००७)

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