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Monday, March 10, 2008

प्रकृति में पढ़ा का क्या अर्थ है?

आप जो कहते हैं कि आपने समाधि-संयम पूर्वक प्रकृति में पढ़ा - उसका क्या अर्थ है?

प्रकृति अपने हर पन्ने को खोला। जैसा प्रकृति है - वैसा हमारे सम्मुख प्रस्तुत हुआ। जैसे अभी हम देख रहे हैं - वैसे ही। समझना और देखना एक ही चीज है - मैंने पहले आप को बताया है। मैं समझने योग्य ढंग से प्रस्तुत हुआ - जिससे प्रकृति स्वयं हमारे सम्मुख प्रस्तुत होता रहा। वैसे ही - जैसे अभी मैं आपके सम्मुख प्रस्तुत हो रहा हूँ। मैं भी तो प्रकृति का एक अंग ही तो हूँ! जो मैं कह रहा हूँ - वह अर्थ या वास्तविकता अस्तित्व में होना ही आप में स्वीकृत होता है। मेरे द्वारा जो अर्थ आप में पहुँचता है - वह अस्तित्व में ही है। अस्तित्व में आपको बोध कराने की प्रक्रिया मैंने शुरू कर दिया। इसको अनुभवगामी कहा। मैं जो प्रस्तुत होता हूँ - उसको अनुभव मूलक कहा।

अभी आप प्रकृति में से ही पढ़ रहे हो। अभी मैं एक व्यक्ति के रूप में प्रकृति हूँ। मेरे सम्मुख समग्र प्रकृति रही। साधना - समाधि - संयम का मतलब यही है। वह सब करने से यह हुआ। इसको मैंने अनुसंधान नाम दिया है। आप जो कर रहे हैं - वह शोध विधि है।

- श्री नागराज शर्मा के साथ संवाद पर आधारित। (जनवरी २००७)

1 comment:

Kaput Pratapgarhi said...

साधुवाद