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Friday, March 6, 2026

विज्ञानमय कोष

 प्रश्न:  “भ्रमित मानव कल्पनाशीलता और कर्म स्वतंत्रता को प्रकाशित करते हुए, विज्ञानमय कोष के सक्रिय न होने के कारण, कर्म करते समय स्वतन्त्र और फल भोगते समय परतंत्र है.” - इसको समझाइये।

उत्तर:  शरीर मूलक विधि से मानव जीवन में चित्त का अधूरा भाग (चित्रण) काम करता रहता है, इसलिए ऐसा होता है.  यही जीव चेतना है.  जीव चेतना में विज्ञानमय कोष सक्रिय नहीं रहता है.  अनुभवमूलक विधि से ही विज्ञानमय कोष सक्रिय होता है, जो ज्ञान-विवेक-विज्ञान सम्पन्नता है.  आत्मा और बुद्धि में ही विज्ञानमय कोष है.  इनकी क्रियाशीलता से ही पूरा जीवन अनुभव को प्रमाणित कर पाता है.  

- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)


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