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Monday, March 30, 2026

जो छूटना चाहता है, उसके लिए सीधा रास्ता बना है.

अभी सरकार स्वयं शराब बनाने, कसाईखाने का लाइसेंस देती है.  वन काटने, खनिजों का दोहन करने के लिए विभाग ही बना है.  इस तरह अपराध परम्परा में सभी सरकार पल रहा है.  आदमी को अपराधी बनाने के लिए शिक्षा परम्परा काम कर रहा है.  अपराध को पनपाने के लिए सरकार काम कर रहा है.  सभी इसमें दसों उंगली फंस गए हैं.  फिर भी इससे जो छूटना चाहता है, उसके लिए सीधा रास्ता बना है.  उनके लिए रास्ता बंद नहीं हो पाया है.  इससे जो छूटना चाहता है, उसको पकड़ने वाला कोई नहीं है.  जैसे मैं छूटना चाहा - मुझे कौन पकड़ा?  कोई अड़चन पैदा नहीं किया, कोई अवरोध नहीं है.  अभी तक शिक्षा विधा में इस प्रस्ताव में यह ठीक नहीं है, कहने वाला कोई लाल पैदा हुआ नहीं।  सरकार में कोई लाल पैदा हुआ नहीं।  मैं डाकुओं, व्यभिचारियों, सतत झूठ बोलने वालों से भी बात किया हूँ - उनके पास भी इसको रोकने का कोई जुगाड़ नहीं है.  अतः सहीपन का रास्ता बना ही है, उसको रोकने वाला कोई नहीं है.  एक तरफ हर व्यक्ति समझदार होना चाहता है, दूसरे तरफ उसको रोकने वाला कोई नहीं है.  समझदारी पूर्वक मनुष्य स्वेच्छा से जियेगा।  इस तरह मैंने आजादी का अनुभव किया।  इसमें कोई मजबूरी की बात नहीं है, थोपने की बात नहीं है, स्वयं स्फूर्त विधि से जैसे जीना है जिए.  


  • श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)

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