दर्शन के अंग्रेजी अनुवाद के लिए परम्परा के शब्दों को वापरना चाहिए, और उसकी परिभाषा कारण-गुण-गणित विधि से प्रतिपादित होना चाहिए। यदि यह होता है तो सर्वशुभ होने का रास्ता बन पाता है. यह नहीं होता है तो नहीं होगा. इसमें अपने को धारारत करने की बात, आजीवन निष्ठा से काम करने की बात है. एक दिन की बात नहीं है यह. यह fictional program नहीं है. यह परम्परा की विधि से है, आर्यश्रेय विधि से है, अनंत काल के लिए विधि से है. इसमें कहीं रुकने की बात नहीं है, enrich होने की बात हो सकती है. क्या enrich करना है? कारण-गुण-गणित को संप्रेषणा में enrich करना है. कुल मिला कर सम्पूर्ण अभिव्यक्ति, संप्रेषणा, प्रकाशन के लिए मूल कारण सहअस्तित्व ही है.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)
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