प्रश्न: आपने लिखा है, भौतिक क्रिया के समृद्ध होने के उपरान्त यौगिक क्रिया में प्रवृत्त हुआ. भौतिक क्रिया के समृद्ध होने से क्या आशय है?
उत्तर: जितने प्रकार के परमाणु की प्रजातियाँ होना है, उनके प्रकट होने के उपरान्त यौगिक क्रिया में प्रवृत्त हुआ. यही भौतिक क्रिया के समृद्ध होने का अर्थ है. परमाणुओं की प्रजातियाँ, परमाणुओं से अणुओं की प्रजातियाँ, अणुओं की रचनायें ये सब इसमें शामिल हैं. सभी मृद, पाषाण, मणि और धातु क समृद्ध होने के बाद ही यौगिक संसार है. यौगिक विधि में सबसे पहले रसायन पानी का प्रकटन हुआ. जिसमें एक जलने वाला है, एक जलाने वाला है - ये दोनों मिलकर प्यास बुझाने वाले हो गए. धरती पर पानी खड़ा होता है. धरती अम्ल और क्षार पानी को देता है, जिससे अम्ल और क्षार के विभिन्न अनुपातों से विभिन्न रस-रसायनों का प्रकटन हुआ. वही आगे चल करके पुष्टि-तत्व और रचना-तत्व में परिणित होते हैं. पुष्टि-तत्व और रचना-तत्व के योगफल में अनेक परम्पराएं बनी. पुष्टि-तत्व और रचना-तत्व का योग ही बीज है.
पहले प्राकृतिक विधि से बीज बनता है, फिर उसके बाद उसका परम्परा होता है. हरेक आगे स्थिति के लिए बीज पीछे स्थिति में बना रहता है. पदार्थावस्था में बीज रूप बनकर के प्राणावस्था में प्रकटन और परम्परा। प्राणावस्था अपने में समृद्ध होकर के जीवावस्था का बीज तैयार करना, जीवावस्था प्रकट होना और परम्परा स्वरूप में स्थापित होना। वैसे ही जीवावस्था में ज्ञानावस्था का बीज होना, ज्ञानावस्था प्रकट होना और परम्परा होना। यह सब क्रम से हुआ है.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)
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