हर पीढ़ी का अगली पीढ़ी के साथ generation gap जो दिखता है, उसकी जरूरत है या नहीं? generation gap की ज़रूरत महसूस होता है, तो जो चल रहा है उसी के साथ continue किया जाए. generation gap का जरूरत महसूस नहीं होता है तो इस विकल्प को सोचा जाए.
इस विकल्प से समझदारी पूरा होता है या नहीं, यह जांचने का अधिकार आपके पास है.
जहाँ कहीं भी आप हैं, उसमें श्रम से जी सकते हैं या नहीं - इसको तय करने में आप समर्थ हैं.
फिर हमारी जो अभी जिम्मेदारियां हैं - बच्चे हैं, बड़े हैं उनकी तरफ. उसके लिए जो अभी तक हमने उपार्जित किया, वो पर्याप्त है या नहीं। उसको आप judge कर सकते हैं.
इन चार बातों पर यदि आप निष्कर्ष निकाल लें तो आगे की बात सोच सकते हैं. इनमें से कोई भी बात छोड़ करके आप भाग नहीं सकते।
सहीपन के लिए यदि हम संकल्प करते हैं तो वह आराम से सफल हो जाता है. इसके विपरीत आदर्शवाद में बताया गया था - श्रेयांसि बहु विघ्नानि भवन्ति महतामपि। अर्थात, सहीपन के लिए तुम चलना चाहते हो, तो विध्न बहुत हैं. मेरा सोचना इससे बिल्कुल विपरीत है. श्रेय के लिए कोई काम करता है तो उसके लिए बहुत सहायता बन ही जाती है. सहीपन के लिए आदमी प्रयत्न करने से कोई तकलीफ नहीं है, सभी सुखद है. मेरे अनुभव के अनुसार ऐसा ही है. सहीपन के लिए अवधारणा न होने से तकलीफ होती ही है. मनमानी कुछ करेंगे तो विध्न होगा ही.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)
No comments:
Post a Comment