क्रियापूर्णता होने पर सतर्कता पूर्ण होता है, जो मानवीयता है. अब क्रियापूर्णता तो है ही, सजगता के साथ आचरण पूर्णता की ओर चले. सतर्कता पूर्ण सजगता सहित देव मानवीयता है. सजगता पूर्ण सहजता सहित दिव्य मानवीयता है.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)
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