अनुभव मूलक विधि से चिंतन का अधिकार पाने के लिए आत्मसात करना पड़ता है. recording सब सूचना है. मैं जो सब लिखा हूँ - वह सब भी सूचना है. प्रमाणित होना मानव को ही है. प्रमाणित होने के लिए आत्मसात करोगे या नहीं?
-> आत्मसात ही करना है!
मुख्य बात इतना ही है। जिस जिज्ञासा से आप लोग आये हैं, उसके लिए इतनी ही बात है। आत्मसात करना हर व्यक्ति का अधिकार है। एक व्यक्ति का अधिकार नहीं है। क्योंकि हर व्यक्ति जीवन और शरीर का संयुक्त स्वरूप है। जीवन के बिना कोई मानव होता ही नहीं है।
सूचनाओं को लेकर उनको प्रकट करने के काम में आप पारंगत हैं. किन्तु चिंतन की वस्तु के रूप में अनुभव को पाने की बात जो है, उसको पाने में अभी भी विलम्ब है.
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (सितम्बर २०११, अमरकंटक)
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