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Thursday, November 24, 2011

प्रचलित विज्ञान का मूल्यांकन

मध्यस्थ दर्शन से सर्वमानव का लक्ष्य निकला – समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व। अभी का विज्ञान क्या करना चाहता है, उसको भी सोचा जाए?

अभी के विज्ञान से जो कल्याण हुआ है और जो नाश हुआ है, उसका मूल्यांकन किया जाए। विज्ञान से सकारात्मक भाग में दूर-संचार मिला है। नकारात्मक भाग में - विज्ञान से धरती बीमार हो गयी, प्रदूषण छा गया, और अपने-पराये की दूरियां बढ़ गयी। ये तीनो अनिष्ट का कारण हो गया। दूरसंचार इष्ट का कारण हुआ – जो विज्ञान-युग का देन है। दूरसंचार भी विज्ञान की चाहत से मानव जाति को हासिल नहीं हुआ। प्रौद्योगिकी विधि से हासिल हुआ। विज्ञानयुग आने के पहले से ही पहिये का आविष्कार हो ही चुका था। पहले मानव ने खुद उसको घुमाया, फिर जानवर से घुमाया। विज्ञान युग में यंत्र को बनाया। यंत्र में ईंधन का संयोग किया। उससे धरती, पानी, हवा पर चलने वाले यान-वाहन बना लिए।

आदर्शवादी युग में भी अपने-पराये की दूरियां रहा – मैं इसका सत्यापन करने के पक्ष में हूँ। आदर्शवादी युग में भी अपने-पराये की दूरियां रही। दूरी पहले से रहा, जो विज्ञान-युग के आने से और बढ़ गया।

- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (मई २००७, अमरकंटक)

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