Monday, February 29, 2016

जीवन और जन्म

"जीवन संस्कारशील है, जन्म भोगशील है.  भोग सापेक्षता में जीवन का विस्मृति ही प्रधानतः अज्ञान है.  जीवन मूल्य की अपेक्षा में ही जीवन का कार्यक्रम निर्धारित होता है.
" - श्री ए नागराज


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