Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Monday, April 13, 2026

जिम्मेदारी से सत्यापन

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“मैं समझा हूँ, जिया हूँ, प्रमाणित हूँ.  हर व्यक्ति समझ सकता है, जी सकता है, प्रमाणित हो सकता है.”  ऐसा मैंने कई जगह पर सत्यापन किया है.   सम...
Friday, April 10, 2026

इस प्रस्ताव का प्रहार

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वास्तविकता के साथ तर्क नहीं होता।  वास्तविकता को या तो स्वीकारना होता है या अस्वीकारना होता है.  वास्तविकता को अस्वीकारने की स्थिति में हीनत...

न्याय-धर्म-सत्य प्रमाणित होने की आवश्यकता

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सबसे कम समय में समझ में आने वाली बात सत्य है, उसके बाद धर्म है, उसके बाद न्याय है, उसके बाद संतुलन है, उसके बाद नियंत्रण है, उसके बाद नियम ह...

पुनर्विचार के लिए विकल्प

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आदर्शवाद के इतिहास में मतभेद तो बहुत हुए हैं.  पहले अद्वैत विचार में  “ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या”, “एकोब्रह्म द्वितीयोनास्ति” के ऊपर बहुत सारा ...
Monday, April 6, 2026

सुन्दर बात

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परमाणु में विकास और रचना में विकास - ये दोनों मिलकर के मानव परम्परा तक पहुंचे।  यह प्रतिपादन न हमको विज्ञान से मिलता है, न ईश्वरवाद से मिलता...
Thursday, April 2, 2026

मानवीयता - देव मानवीयता - दिव्य मानवीयता

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क्रियापूर्णता होने पर सतर्कता पूर्ण होता है, जो मानवीयता है.  अब क्रियापूर्णता तो है ही, सजगता के साथ आचरण पूर्णता की ओर चले.  सतर्कता पूर्ण...

उपदेश

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उपदेश है:  जाने हुए को मान लो, माने हुए को जान लो. उपदेश की परिभाषा है - उपाय सहित आदेश।   स्वयं का आदेश होने पर हम स्वयंस्फूर्त होते हैं.  ...
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