Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Monday, February 28, 2011

बुद्धि का प्रयोग

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जीवन देखता है। जीवन बुद्धि पूर्वक ही देखता है। बुद्धि यदि शामिल नहीं है तो जीवन द्वारा देखना बनता ही नहीं है। भ्रमित स्थिति में बुद्धि भ्रमि...
Saturday, February 26, 2011

जिज्ञासा और समाधान

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प्रश्न: मानव व्यव्हार दर्शन में अध्यायों का जो क्रम है, उस क्रम का निर्धारण आपने कैसे किया? उत्तर: जिस क्रम में मैंने अनुभव किया था, उस क्रम...
Friday, February 25, 2011

संवाद

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प्रश्न: “चेतना विकास – मूल्य शिक्षा” से क्या आशय है? उत्तर: “चेतना विकास” को छोड़ करके “मूल्य शिक्षा” होता नहीं है। इसीलिये “चेतना विकास – मू...
Thursday, February 24, 2011

मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व - भाग २

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प्रश्न: “यथार्थ” क्या है? जैसा जिसका अर्थ है – वह यथार्थ है। चारों अवस्थाओं का अर्थ अलग-अलग है। प्रश्न: “भ्रमित-मानव कर्म करते समय स्वतंत्र,...
Tuesday, February 22, 2011

मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व - भाग १

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प्रश्न: “मूल तत्व” से क्या आशय है? “तत्व” से आशय है – सत्य। “ मूल तत्व” का मतलब है – मूल में सत्य क्या है, कैसा है? मानव जाति सदा से सत्यान्...
Thursday, February 17, 2011

प्रत्यक्ष और प्रमाण

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प्रमाण का स्वरूप है - अनुभव प्रमाण, व्यवहार प्रमाण, प्रयोग प्रमाण अनुभव में यदि सहअस्तित्व दर्शन ज्ञान, जीवन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण ज्ञा...
Wednesday, February 16, 2011

जीवन और शरीर

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समझने की पूरी ताकत जीवन में है। जीवन शरीर के आकार में हो कर शरीर को जीवंत बनाता है। शरीर रासायनिक-भौतिक रचना है, जीवन एक गठनपूर्ण परमाणु है।...
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