Friday, August 21, 2026

आप्त-पुरुषों के विधिवत उपदेश

 प्रश्न:  आपने अनुभव दर्शन में लिखा है - “क्लेश ही दासय्ता है.  यह अजागृति का प्रतीक है.  उससे मुक्ति ही स्वतंत्रता सहज लक्षण है.  दास्यता से मुक्ति हेतु ही आप्त-पुरुषों के विधिवत उपदेश हैं, जो जीवन के कार्यक्रम और व्यवस्था के प्रेरणा स्त्रोत हैं.”


यहाँ किन आप्त-पुरुषों की बात हो रही है?


उत्तर: यहाँ मैं जो बैठा हूँ, कम से कम एक.  Multiply हो जाऊँगा तो अनेक। हमसे पहले कोई शुभ के लिए काम नहीं किया, यह कहना बहुत ज्यादा निष्ठुरता होगा।  चाहत तो दे कर गए.  चाहत दे कर नहीं जाते तो हम साधना कर ही नहीं पाते।  


  • श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७)

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