Monday, April 6, 2026

सुन्दर बात

परमाणु में विकास और रचना में विकास - ये दोनों मिलकर के मानव परम्परा तक पहुंचे।  यह प्रतिपादन न हमको विज्ञान से मिलता है, न ईश्वरवाद से मिलता है.  

अनुसन्धान है:  परिणाम का अमरत्व (गठन पूर्णता), श्रम का विश्राम (क्रिया पूर्णता), गति का गंतव्य (आचरण पूर्णता)


अभी तक इसका जिक्र परम्परा में था नहीं।  न भौतिकवाद कर पाया, न आदर्शवाद कर पाया।  इन तीनों बातों को बोध कराने के लिए क्या ये कुछ किये हैं?  


अनुभव ज्ञान आपके सम्मुख प्रस्तुत किया, यदि मानव चाहते हैं तो इस ज्ञान को अपना सकते हैं.  सुन्दर बात इतना ही है.  हर मानव समझदार होना चाहता है, किसी आयु के बाद हर व्यक्ति अपने आप को समझदार मानता ही है.  यह दोनों बात सर्वेक्षित हो गयी.  इस आधार पर आशा रखकर इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किये।  यदि यह नहीं होता तो इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने का कोई जगह ही नहीं था.  पूरा मानव परम्परा ही जब अपकृत्यों में लगा है तो इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने का जगह कहाँ है? मानव का आशय के आधार पर इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया है.  पहले एक दो व्यक्तियों को यह बात स्वीकार होने में काफी समय लगा.  दो से चार, चार से चालीस, चालीस से चार हज़ार होने में कम समय लगा.  मानव परम्परा में यह ज्ञान समा जाना चाहिए।  


- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)

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