"जीवन मूल्य के अर्थ में व्यवहार मूल्यों का प्रायोजित होना ही सफलता है. जीवन मूल्यों के अर्थ में समाज मूल्यों का आचरण, निर्वाह, संरक्षण, संवर्धन और प्रोत्साहन ही न्याय सुलभता है." - श्री ए नागराज
This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)
Friday, May 13, 2016
Wednesday, May 11, 2016
बाध्यता, जिज्ञासा और विवशता
"मानवीय गुणों के लिए मनुष्य बाध्य है. दिव्य गुणों के लिए जिज्ञासु एवं अमानवीय गुणों के लिए विवश है. बाध्यता कर्त्तव्य और अधिकार में, जिज्ञासा अभ्युदय में, विवशता दास्यता में ख्यात है." - श्री ए नागराज
Monday, May 2, 2016
व्यक्तित्व का सौंदर्य
"इंद्रियों का क्रियाकलाप जीवन के अनुग्रह अर्थात शरीर की जीवंतता पूर्वक होता है, लेकिन शरीर को ही जीवन मान लेने के भ्रमवश इंद्रिय सन्निकर्षात्मक कार्यों को ही महत्त्वपूर्ण मान लेने और सुख तथा सौंदर्य का आधार मान लेने से जीवन की महिमा और प्रयोजनों को पाना संभव नहीं हो पाया। जबकि मनुष्य के लिए आहार, विहार, व्यवहार और व्यवस्था में व्यक्तित्व का सौंदर्य मूल्यांकित होता है. व्यक्तित्व सौंदर्य का आधार है. सौंदर्य के साथ सुख, सुख के साथ समाधान-समृद्धि, समाधान-समृद्धि के साथ व्यक्तित्व, और व्यक्तित्व के साथ नित्य सौंदर्य है." - श्री ए नागराज