Saturday, November 17, 2012

बुद्धि

वस्तु है, तभी उसकी सूचना है।  सूचना चाहे गलत हो या सही - वस्तु है, तभी सूचना है।  देखने में वस्तु की आकृति गृहण का कार्य बुद्धि ही करता है, जो चित्त (चित्रण) में संग्रहित होता है।  बुद्धि यदि शामिल न हो तो कुछ दिखाई न दे!  बुद्धि देखने के क्रियाकलाप में शामिल तो रहता है, पर भ्रमित क्रियाकलापों को स्वीकारता नहीं है।  बुद्धि शाश्वत वस्तु को ही स्वीकारता है।  बुद्धि जो स्वीकारता नहीं है, इसीलिये उसको "अहंकार" भी कहा है।

बुद्धि अर्थ को ही ग्रहण करता है, शब्द को ग्रहण नहीं करता।  मानव द्वारा अपनी कल्पना से अर्थ निकाले अर्थ का जब प्रमाण होता नहीं है, तो वह बुद्धि को स्वीकार नहीं होता।

- श्री ए नागराज के साथ संवाद पर आधारित (अक्टूबर 2010, अमरकंटक)

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