Saturday, June 23, 2012

स्वयं का मूल्यांकन

मानव को अपने विकास की दृष्टि से स्वयं का मूल्यांकन करना प्राथमिक एवं महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है।  स्वयं का मूल्यांकन यदि सही नहीं है तो उस स्थिति में अध्ययन के लिए आवश्यक सामर्थ्य को संजो लेना संभव नहीं है।  - मानव व्यव्हार दर्शन, श्री ए. नागराज।

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