Tuesday, November 18, 2008

मानव की परिभाषा

मनाकार को साकार करने वाला, और मनः स्वस्थता की आशा करने वाला - तथा प्रमाणित करने वाला मानव है।

मानव जीवन और शरीर का संयुक्त स्वरूप है।

मनाकार से अर्थ है - रूप और गुण के अनुसार चित्रण करना। यह कल्पनाशीलता की महिमा है। जीवन में आशा, विचार, और इच्छा का संयुक्त रूप है - कल्पना। कल्पना से ही मनुष्य अपनी योजना, कार्य-योजना बनता है, उनको क्रियान्वित करता है।

मनः स्वस्थता की मनुष्य में सहज-अपेक्षा रहती है। हर मनुष्य सुख चाहता है। सुख की आशा हर मनुष्य में है। सुख की निरंतरता ही मनः स्वस्थता का स्वरूप है। समाधान ही सुख है। हर मनुष्य अध्ययन पूर्वक समाधानित हो सकता है, और सुख की निरंतरता को अपने जीने में प्रमाणित कर सकता है।

सुख की निरंतरता को जीने में प्रमाणित करना ही मनः स्वस्थता का प्रमाण है।

मनाकार को साकार करने में मनुष्य सफल हो चुका है। सामान्य-आकांक्षा (आहार, आवास, अलंकार) और महत्त्वाकांक्षा सम्बंधित वस्तुओं का उपार्जन इसी तरह हुआ।

मध्यस्थ-दर्शन मनः स्वस्थता को प्रमाणित करने के लिए एक प्रस्ताव है।

- बाबा श्री नागराज शर्मा के साथ संवाद पर आधारित।

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