दर्शन का मतलब है "जीना" = "मैं जैसा हूँ"।
मेरा जीना आपके लिए दर्शन है। आपका जीना मेरे लिए दर्शन है। मेरा आचरण मेरे लिए दर्शन है। मेरे आचरण को मैं जानता-मानता हूँ, इसलिए यह मेरा, मेरे लिए दर्शन है। मेरे आचरण को जो आप देखते हैं - आपके लिए प्रेरणा रूप में वह दर्शन है। अध्ययन पूर्वक यह प्रेरणा आपका स्वत्व बनता है। आपका जब यह स्वत्व बन जाता है - तब यह आपका दर्शन हो गया। इस तरह ज्ञानावस्था की multiplication theory बनी।
- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (जनवरी २००७)
No comments:
Post a Comment