Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Thursday, December 19, 2024

पदार्थ की परिभाषा

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पदार्थ = पद भेद से अर्थ भेद को प्रकट करने वाली वस्तु पदार्थावस्था में अनेक प्रजाति के परमाणुओं के रूप में अर्थ को व्यक्त किया.   प्राणावस्था...
Wednesday, December 18, 2024

पारगामीयता और पारदर्शीयता

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प्रश्न: ज्ञान की पारगामीयता और पारदर्शीयता को प्रमाणित करने का क्या अर्थ है? उत्तर:  सर्वत्र एक सा विद्यमान व्यापक वस्तु को ज्ञान नाम दिया ह...
Tuesday, December 10, 2024

संवाद

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 प्रकृति सत्ता मे प्रेरणा पाने योग्य स्थिति मे है.  प्रकृति सत्ता मे स्वयं स्फ़ुर्त विधि से, स्वयं प्रवृत्त विधि से प्रेरणा पाता ही रहता है. ...
Sunday, November 17, 2024

तर्क का प्रयोग एक सीमा तक ही है

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प्रश्न: संयम काल में जो आपको दिख रहा था वह सत्य है, न कि आपकी कल्पना - इस पर आपकी निश्चितता कैसे बनी? उत्तर:  आप अनुभव करके देखलो, यह सत्य ह...
Sunday, October 13, 2024

आचरण की ही परम्परा होती है.

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आचरण की ही परम्परा होती है.  मानव के आचरण के तीन आयाम हैं - मूल्य, चरित्र, नैतिकता।  मानवीयता पूर्ण आचरण के आधार पर संविधान, संविधान के आधार...
Saturday, August 31, 2024

साधु लोगों के बारे में

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 प्रश्न:  अभी परम्परा में साधु लोगों के बारे में आपका क्या कहना है? उत्तर:  साधु लोगों की सेवा करने वाले सभी व्यापारी हैं.  उन्ही के संरक्षण...
Sunday, July 14, 2024

आत्मा ब्रह्म से नेष्ठ नहीं है

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सहअस्तित्व स्वरूपी सत्य में न्याय और धर्म दोनों समाहित रहते हैं, इसीलिये सत्य में अनुभूत होने वाली बात आती है.  आत्मा सत्य में अनुभूत होता ह...
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