Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, November 17, 2024

तर्क का प्रयोग एक सीमा तक ही है

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प्रश्न: संयम काल में जो आपको दिख रहा था वह सत्य है, न कि आपकी कल्पना - इस पर आपकी निश्चितता कैसे बनी? उत्तर:  आप अनुभव करके देखलो, यह सत्य ह...
Sunday, October 13, 2024

आचरण की ही परम्परा होती है.

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आचरण की ही परम्परा होती है.  मानव के आचरण के तीन आयाम हैं - मूल्य, चरित्र, नैतिकता।  मानवीयता पूर्ण आचरण के आधार पर संविधान, संविधान के आधार...
Saturday, August 31, 2024

साधु लोगों के बारे में

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 प्रश्न:  अभी परम्परा में साधु लोगों के बारे में आपका क्या कहना है? उत्तर:  साधु लोगों की सेवा करने वाले सभी व्यापारी हैं.  उन्ही के संरक्षण...
Sunday, July 14, 2024

आत्मा ब्रह्म से नेष्ठ नहीं है

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सहअस्तित्व स्वरूपी सत्य में न्याय और धर्म दोनों समाहित रहते हैं, इसीलिये सत्य में अनुभूत होने वाली बात आती है.  आत्मा सत्य में अनुभूत होता ह...

व्यवस्था के अर्थ में अस्तित्व को समझना

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प्रश्न: ज्वार-भाटा को आप कैसे देखते हैं? उत्तर: चन्द्रमा धरती का उपग्रह है.  धरती चन्द्रमा को अपने साथ बनाये रखने में जो खुशहाली व्यक्त करता...
1 comment:
Tuesday, July 9, 2024

आगे की सोच

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जब प्यास लगे तब कुआँ खोद के पानी पियें, वह अच्छा है - या पहले से कुआं रहे, जब प्यास लगे उससे पानी पिएं - वह अच्छा है?  पहले से कुआं रहे, वही...
Sunday, April 28, 2024

एक गाँव में पहले इसको सफल बनाया जाए.

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 "धरती बीमार हो गयी है" - इसको उजागर करने के लिए न तो विज्ञान संस्थाएं, न शिक्षा संस्थाएं, न राज्य संस्थाएं और न ही व्यापार संस्था...
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