Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Wednesday, May 11, 2022

विचार और तर्क

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विचार का एक छोटा सा भाग तर्क है.  स्वीकृति के लिए निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए तर्क है.  निष्कर्ष को जीने में उतारने के लिए तर्क है. अभी हम वि...
Sunday, May 8, 2022

स्व-मूल्यांकन

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स्वयम पर विश्वास समझदारी से होता है.  विकसित चेतना (मानव चेतना, देव चेतना, दिव्य चेतना) समझदारी का स्वरूप है.  जीव चेतना समझदारी नहीं है.  व...
Wednesday, April 6, 2022

मानव-मानव में समानता की पहचान

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 मानव-मानव में समानता की पहचान के साथ ही उनका "साथ में रहना" प्रमाणित होता है.  समानता की पहचान अधूरा रहता है तो उनका "सहवास ...
Monday, February 21, 2022

क्रिया, ज्ञानगोचर को समझना

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Thursday, February 17, 2022

स्वकृपा आवश्यक है

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स्वकृपा के बिना ज्ञानप्राप्ति संभव नहीं है.  हमारे चाहे बिना हमको अनुभव कैसे हो सकता है?  अनुभव होने का अधिकार हमारे पास है, यह तो मेरा पहले...
Sunday, November 21, 2021

समझदार होने के प्रति ईमानदारी

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 समझदारी के प्रस्ताव को समझ के फिर जाँचना होता है.  बिना समझे जाँचने का कोई मतलब नहीं निकलता.  विगत की विचारधाराओं को जांचने से कुछ निकलेगा ...
Thursday, November 18, 2021

समझदारी या मजामारी

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अब दो ही रास्ते हैं आदमी के पास - समझदारी या मजामारी.  मजामारी में सभी अपराध वैध हैं.  समझदारी में वैध बात अलग है, अवैध बात अलग है.  जैसे - ...
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