Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Thursday, August 12, 2021

जीना मूल बात है

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प्रश्न: मध्यस्थ दर्शन का आपका यह प्रस्ताव सुनने के बाद यह तो कहना नहीं बनता कि यह ठीक नहीं है, या हमको यह नहीं चाहिए.  थोड़ा और आगे चलने के ब...
Tuesday, August 10, 2021

सच्ची बात

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प्रश्न:  आप पूरी धरती पर सभी मानवों को समझदार बनाने की बात करते हैं, जबकि अभी अनुभव संपन्न व्यक्तियों की गिनती एक से आगे बढ़ी नहीं है.  इसको ...

विश्लेषण पूर्वक मूल्यों की स्वीकृति

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प्रिय-हित-लाभ दृष्टियों से सच्चाई का विश्लेषण नहीं हो पाता.  इस तरह जीव चेतना में बिना विश्लेषण किये संवेदनाओं की तृप्ति हेतु व्यक्ति दौड़ता ...

भय और प्रलोभन पूर्वक सच्चाई का बोध नहीं होता

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ब्रह्मवादी/आदर्शवादी सब कुछ भय और प्रलोभन के आधार पर ही बताये हैं.  जितने भी आदर्शवादी शास्त्र और कथाएँ मिलते हैं - वे सब भय और प्रलोभन के आ...
Monday, August 9, 2021

विज्ञान के अराजक होने का कारण

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 हर वस्तु अनंत कोण संपन्न है. हर वस्तु प्रकाशमान है. हर वस्तु दूसरे वस्तु को पहचानता है. ये तीन बातें अभी विज्ञान में नहीं पढ़ाते हैं.  बुनिय...
Wednesday, August 4, 2021

मानवीयता में क्रियापूर्णता रहता ही है

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मानवीयता में क्रियापूर्णता रहता ही है.  अर्थात अनुभव सम्पन्नता के उपरान्त समाधान पूर्वक जीना बनता ही है, न्याय पूर्वक जीना बनता ही है, नियंत...
Tuesday, July 27, 2021

व्यापक - ज्ञान - चेतना

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 अनुभव होने पर "ज्ञान व्यापक है" - यह पता चलता है. "चेतना और ज्ञान एक है" - यह दिव्य चेतना में प्रमाणित होने पर पूरा होत...
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