Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Friday, December 27, 2019

पद, पद चक्र और पद मुक्ति

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पद भेद से अर्थ भेद को व्यक्त करने वाली वस्तु की पदार्थ संज्ञा है.  चार पद हैं - प्राण पद, भ्रांत पद, देव पद और दिव्य पद.  पदार्थ ही इन...
Tuesday, December 24, 2019

पहली बात है - मानव का अध्ययन

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अभी हर व्यक्ति अपने स्वरूप को भुलावा देकर जी रहा है.  वैसे जी नहीं पाता है, इसीलिये ऊटपटांग होता है. क्या अपने को पूरा भुला कर कोई आदमी ज...

होने-रहने का प्रमाण मानव ही है

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क्षमता = वहन क्रिया, योग्यता = प्रकाशन क्रिया, पात्रता = ग्रहण क्रिया ये तीनों क्रियाएं हरेक एक में समाई हैं. प्रश्न:  तो क्या पत्थर मे...
Monday, December 23, 2019

सिद्धांत, प्रक्रिया, विधि, पद्दति

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सिद्धांत:-  सिद्धांत वह है जिसके अंत में समाधान सिद्ध होता है. प्रक्रिया:-  किसी प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए श्रंखलाबद्ध कार्यकलाप की प्...

ग्रहण क्रिया के लिए वस्तु

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ग्रहण क्रिया को पात्रता कहा है.  मानव में समझदारी के लिए ग्रहण क्रिया बनी हुई है.  इस पात्रता के अनुरूप वस्तु भी होने की आवश्यकता है.  अभी ...
Monday, December 9, 2019

सर्वभाषा में समानता का सूत्र

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सर्वभाषा में समानता का सूत्र है - कारण गुण गणित भाषा का प्रयोजन है - मानव परस्परता में सच्चाई की सम्प्रेष्णा मानव में सच्चाई को प्रमाण...
Friday, December 6, 2019

मानसिकता

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मानव संवेदनाओं से अपने को व्यक्त करता है. मानव संवेदनाओं द्वारा अपनी मानसिकता को व्यक्त करता है. संवेदनाओं को व्यक्त करते समय मानव (भ्र...
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