Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Monday, April 29, 2019

प्रमाण की ही परंपरा होती है

›
मेरे गुरु जी (रमण मह्रिषी और आचार्य चंद्रशेखर भारती) ने मुझे कुछ कहा (साधना के लिए मार्गदर्शन दिया) - उस प्रभाव को मैंने स्वीकार कर लिया...
Monday, April 15, 2019

क्रिया से क्रिया की तृप्ति संभव नहीं है

›
प्रश्न:  आपने मानव व्यव्हार दर्शन में लिखा है - "विषयासक्त मानव क्रिया से क्रिया की तृप्ति चाहता है, जो संभव नहीं है.  संवेदन क्रिया स...
Thursday, April 11, 2019

तर्क सच्चाई तक पहुँचने का सेतु है

›
तर्क सच्चाई (तात्विकता) तक पहुँचने का एक सेतु है.  कारण, कार्य, फल-परिणाम में सामंजस्यता करते हुए तर्क है.  तर्क साधन है, साध्य नहीं है.  त...

समझदारी से सोचा जाए!

›
संसार में मानव परंपरा है.  मानव परंपरा ज्ञान-अवस्था में है.  इसके प्रमाण में मानव ने अपना भाषा विकसित किया.  भाषा को ज्ञान के स्वरूप में ही...
Thursday, March 14, 2019

साम्य ऊर्जा मनुष्य प्रकृति में ज्ञान स्वरूप में है.

›
जो कुछ भी प्रकृति में प्रकटन हुआ है वह नियम से हुआ है.  नियम के मूल में आशय होता है.  वह आशय क्या है?  वह आशय साम्य ऊर्जा (सत्ता) है.  साम्...
Monday, December 24, 2018

अनुभव पूरा होता है, उसका अभिव्यक्ति क्रम से होता है.

›
अनुभव पूरा होता है, उसका अभिव्यक्ति क्रम से होता है.  जीव चेतना से मानव चेतना में परिवर्तन के लिए अनुभव एक साथ ही होता है.  वह क्रम स...
Wednesday, December 12, 2018

परिवार की बात विगत के शास्त्रों में नहीं है.

›
बोलना कोई जीना नहीं है.  जीने में समाधान ही होगा, समृद्धि ही होगा - और इसके अलावा कुछ भी नहीं होगा.  बोलना एक 'सूचना' है.  'ज...
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.