Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Friday, November 30, 2018

प्रकृति में परस्पर पहचान का स्वरूप

›
भौतिक रासायनिक वस्तुओं की परस्परता में जो दूरियाँ रहती है, वह स्वयं व्यापक वस्तु (सत्ता) ही है.  जहाँ भौतिक रासायनिक वस्तुएं हैं वहाँ ...
Saturday, November 24, 2018

हर अगली अवस्था का भ्रूण उसकी पिछली अवस्था में बनता है

›
पदार्थावस्था में जितने प्रजाति के परमाणु होना था, उनका प्रकटन होने के बाद उसमे यौगिक क्रिया का भ्रूण बना.  भ्रूण बनने का अर्थ है - पदार्...
Wednesday, November 21, 2018

योग-संयोग न हो, ऐसा कोई स्थिति ही नहीं है

›
सत्ता में संपृक्त प्रकृति के कारण योग-संयोग है.  सारी क्रियाएं इसी प्रकार हैं. मानव शरीर यात्रा के सुगम बने रहने के लिए भी योग-संयोग चा...
Tuesday, November 20, 2018

सहअस्तित्व में योग-संयोग

›
प्रश्न: एक वृक्ष के सभी बीज अंकुरित नहीं हो जाते, एक जीव की सभी संतानें अपनी पूरी आयु जी नहीं पाती - यह हमको प्रकृति में दिखता है, वैसे ...
Thursday, November 15, 2018

नियम नियंत्रण संतुलन

›
Sunday, November 11, 2018

किताब के साथ पारंगत व्यक्ति का होना आवश्यक है

›
वांग्मय और उसको पढने वाला - इन दोनों के बीच में एक पारंगत व्यक्ति भी होता है.  पारंगत व्यक्ति को भुलावा दे कर हम केवल वांग्मय से कभी पार...
Friday, November 9, 2018

स्त्रोत की ओर ध्यानाकर्षण

›
जीवन विद्या योजना इस अनुसंधान की "सूचना" को जनसामान्य तक पहुंचाने का एक कार्यक्रम है.  उससे लोगों में उत्साह होता है.  उत्साहित ...
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.