Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Thursday, December 22, 2016

ध्यान

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मैंने यह भी निष्कर्ष निकाला है - मैंने जो तपस्या किया या साधना किया , वह विगत में जो यती , सती , संत , तपस्वी किए हैं - उससे "बड़ा...
Tuesday, December 20, 2016

एक दृष्टान्त

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भारतीय परंपरा से हमको संस्कृत जैसी प्रचण्ड भाषा धरोहर स्वरूप में मिल गयी.  इसका एक भाषा-विज्ञान है.  यदि यह भाषा न मिली होती तो इस समझ को...
Tuesday, December 13, 2016

जीवनी क्रम

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जीव संसार जीवनी क्रम में है.  इसका प्रमाण है - गाय का बछड़ा गाय जैसा ही आचरण करता है.  वैसा ही वह खाता है, पीता है, दौड़ता है - जैसा पिछल...
Sunday, December 11, 2016

अनेक शरीर यात्राएं !

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प्रश्न:  क्या बहुत सारी जीव योनियों से गुजरने के बाद जीवन को मानव शरीर चलाने के लिए मिलता है? उत्तर: जिसका प्रमाण नहीं, वह बात मुझे क...
Monday, December 5, 2016

जीवन विद्या शिविर के प्रबोधकों के लिए मार्गदर्शन

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जीवन विद्या प्रबोधकों के लिए मार्गदर्शन: अध्ययन बिंदु - श्री ए नागराज के साथ संवाद (अगस्त २००६, अमरकंटक)
Thursday, December 1, 2016

दावे की बात

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मैं निम्न तीन दावे करता हूँ: - पहला, मैं अपने सहअस्तित्व में अनुभव किये होने का दावा करता हूँ. दूसरा, मैं सहअस्तित्व के अनुरूप स्वय...
Sunday, November 20, 2016

अध्ययनशील लोगों के बीच मंगल मैत्री का मार्ग

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प्रश्न:  अध्ययनशील लोगों के बीच मंगल-मैत्री और समानता का क्या सूत्र होगा? उत्तर:  ये सभी लोग, जो जीवनविद्या मध्यस्थ दर्शन - सहअस्तित्वव...
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