Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, October 30, 2016

जितना समझे हैं, उतना ही करना होता है

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समझना और फिर समझ को प्रमाणित करना।  समझने में भले ही २-४ दिन ज्यादा लग जाए, क्या आपत्ति है? प्रश्न: यह २-४ शरीर यात्राओं की तो ...
Sunday, October 16, 2016

शिक्षा के लिए मार्गदर्शन

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हर मानव संतान जन्म से ही न्याय का याचक है, सही कार्य-व्यव्हार करने का इच्छुक है और सत्य वक्ता है.  इसकी गवाही में हम हर मानव संतान को...
Saturday, October 15, 2016

निष्कर्ष

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    अध्ययन विधि से जागृत होना सबके वश का है.  दूसरा विधि साधना-संयम है, जिसको करना सबके वश का नहीं है.  सबके वश की जो बात न हो वह ...

सहअस्तित्व में प्रकटनशीलता

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मैंने जो साधना, समाधि, संयम पूर्वक अध्ययन किया, उसमें  सर्वप्रथम सह-अस्तित्व को देखा (मतलब समझा)।  सत्ता में संपृक्त प्रकृति स्वरू...
Saturday, August 20, 2016

The Minimum Beautiful

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Shree A. Nagraj (1920-2016), who we used to affectionately call “Baba”, breathed his last on the morning of March 5th 2016 at his home i...
1 comment:
Sunday, July 24, 2016

अनुभव प्रमाण

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जीवन में दसों क्रियाओं के क्रियाशील हुए बिना "प्रमाण" नहीं होगा। न्याय-अन्याय से अध्ययन शुरू करते हैं.  जीव चेतना में (जीते...

जीवन मूलक जीने का प्रस्ताव

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मानव ने अपने इतिहास में आज तक शरीर मूलक जी कर देख लिया है.  यह जीवन मूलक जीने का प्रस्ताव है.  इसके लिए अनुभव मूलक विधि को मानव परंपरा मे...
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