Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, December 21, 2014

अनुसंधान की पृष्ठभूमि

›
- जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन २००९, हैदराबाद 

मध्यस्थ क्रिया के लिये सम क्रिया का प्रयोग

›
- जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मलेन, नवम्बर २०१०, बांदा (उत्तर प्रदेश)
Saturday, November 15, 2014

नित्य वर्तमान

›
अस्तित्व में सत्ता स्वयं ही मध्यस्थ है क्योंकि सम्पूर्ण प्रकृति सत्ता में सम्पृक्त विधि से ही नित्य वर्तमान है.  इसी विधि से  अस्तित्व सहज...

अनुसन्धान का मूल

›
(मध्यस्थ दर्शन के) इस अनुसन्धान के मूल में रूढ़ियों के प्रति अविश्वास, कट्टरपंथ के प्रति अविश्वास रहा है.  सार रूप में वेदान्त रूप में ...
Tuesday, November 11, 2014

इन्द्रियगोचर और ज्ञानगोचर

›
सहअस्तित्व (सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति) समझ में आने पर यह पहचानना सुलभ हो गया कि ज्ञान और इन्द्रियों के संयुक्त स्वरूप की मानव संज्ञा है.  ...
Tuesday, July 22, 2014

अवलोकन

›
अवलोकन = अवधारणा के स्वरूप में वस्तु को देखने की विधि सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति के स्वरूप में अस्तित्व का अवलोकन है.  जीवन और शरीर के सम...

अस्तित्व मूलक मानव केंद्रित चिंतन

›
अस्तित्व नित्य वर्तमान है - चाहे आप उसे मानें या न मानें, जानें या न जानें।  वर्तमान में जो प्रमाणित होता है, वह पहले से था ही!  जो था नहीं...
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.