Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Wednesday, April 2, 2014

प्रकृति सहज चार अवस्थाएं

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अस्तित्व में परमाणु का विकास

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Tuesday, March 25, 2014

ज्ञान और सुख की सहज अपेक्षा

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४ विषयों (आहार, निद्रा, भय, मैथुन) का ज्ञान जीवों में "करने" के रूप में है.  जीव-जानवर विषयों को पहचानते हैं, तभी तो उनको करते है...
Sunday, February 9, 2014

स्थिति गति

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प्रश्न: "स्थिति गति" से क्या आशय है? उत्तर: अस्तित्व में हर वस्तु की स्थिति गति है.  स्थिति का मतलब है - होना।  गति का मतलब है ...
Thursday, January 16, 2014

उपयोग विधि, कार्य विधि, होने की विधि

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चारों अवस्थाओं की उपयोग विधि, कार्य विधि और होने की विधि है.  उपयोग और कार्य विधि रूप और गुण की सीमा तक है, जो साक्षात्कार, बोध और अनुभव की...
Sunday, December 1, 2013

मौलिकता

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प्रश्न: मौलिकता क्या है? उत्तर: हर वस्तु में उसकी प्रजाति की मौलिकता है.  जैसे - दो अंश के परमाणु की एक मौलिकता है, जो दो अंश वाले परमाणु...
Sunday, November 10, 2013

मानव की पहचान

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ज्ञानगोचर और इन्द्रियगोचर के संयुक्त रूप में मानव की पहचान है.  मानव में समझदारी ज्ञानगोचर है.  ईमानदारी ज्ञानगोचर है.  जिम्मेदारी ज्...
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