Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, December 1, 2013

मौलिकता

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प्रश्न: मौलिकता क्या है? उत्तर: हर वस्तु में उसकी प्रजाति की मौलिकता है.  जैसे - दो अंश के परमाणु की एक मौलिकता है, जो दो अंश वाले परमाणु...
Sunday, November 10, 2013

मानव की पहचान

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ज्ञानगोचर और इन्द्रियगोचर के संयुक्त रूप में मानव की पहचान है.  मानव में समझदारी ज्ञानगोचर है.  ईमानदारी ज्ञानगोचर है.  जिम्मेदारी ज्...
Saturday, April 13, 2013

अध्ययन और कार्यक्रम

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प्रश्न: हम जो इस दर्शन के लोकव्यापीकरण कार्यक्रम में लगे हैं, क्या वह हमारे अध्ययन के लिए सहायक है या बाधक है? उत्तर: सहायक है। प्रश्न:...
Wednesday, March 13, 2013

जिज्ञासा समझने के लिए तैयारी है

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प्रश्न: अनुभव की स्थिति के बारे में तो आपने तीन प्रमाण (अनुभव प्रमाण, व्यवहार प्रमाण और प्रयोग प्रमाण) बताया।  अनुभव के पहले की क्या स्थ...
Monday, March 4, 2013

सर्वमानव के लिये प्रस्ताव

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मैंने इस प्रस्ताव को "सर्वमानव" के लिये प्रस्तुत किया है।  इस प्रस्ताव के बारे में "सर्वमानव" के आधार पर बात हो सकती...
Saturday, March 2, 2013

जागृति का ही प्रमाण होता है

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जागृतिक्रम का कोई प्रमाण नहीं होता, जागृति का ही प्रमाण होता है। प्रश्न: "जागृति क्रम" बोध की वस्तु है या नहीं? उत्तर: नही...
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पिछली शरीर यात्रा का अगली शरीर यात्रा पर प्रभाव

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प्रश्न: पिछली शरीर यात्रा का अगली शरीर यात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर: पिछली शरीर यात्रा में जो पराभव से त्रस्त रहे, वह पराभव न...
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