Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, April 29, 2012

स्वयं की संतुष्टि के लिए अध्ययन

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संयम में जब मुझे दृश्य दिखना शुरू हुआ, पहले दिन से ही मुझे यह स्वीकार हो गया कि यह मेरे स्वरूप का ही अध्ययन है.  यह मेरे स्वयं की संतुष्टि क...
Friday, April 27, 2012

ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए

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समझने की प्यास हम सभी में एक जैसी है.  समझने के लिए कुछ बातें दृष्टिगोचर और ज्ञानगोचर संयुक्त रूप में हैं.  कुछ बातें केवल ज्ञानगोचर से ही...
Wednesday, April 25, 2012

सत्ता के “होने” को समझना

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आप हमारे बीच में जो खाली वस्तु है, हर परस्परता के मध्य में जो वस्तु है – वही सत्ता है.  सत्ता पारगामी, पारदर्शी और व्यापक है.  व्यापक का अ...

ध्वनि - ताप - विद्युत

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परमाणु में गति के स्वरूप को हमने समझा. गति के फल-स्वरूप ही ध्वनि भी होता है, ताप भी होता है, विद्युत भी होता है। ताप, ध्वनि, और विद्युत का...

व्यवस्था का सूत्र

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व्यापक वस्तु में प्रकृति की इकाइयां डूबी, भीगी और घिरी है.  व्यापक वस्तु पारगामी होने के आधार पर सभी इकाइयां इसमें भीगी है.  परमाणु-अंश भी भ...
Tuesday, April 10, 2012

व्यंजना और अनुभव

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प्रश्न: “व्यंजना” से क्या आशय है? उत्तर: हर मानव में, हर आयु में कल्पनाशीलता है. कल्पनाशीलता में जो कुछ भी आकार आता है, वह व्यंजना है. ...

काल वादी ज्ञान

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क्रिया की अवधि का नाम है – काल. जैसे सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक धरती की घुर्णन क्रिया की अवधि को “एक दिन” कहते हैं. क्रिया की अवधि का वि...
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