Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Sunday, October 30, 2011

संयम-काल में अध्ययन-पूर्वक अनुभव

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प्रश्न: आपको अनुभव संयम-काल के पहले हुआ, बाद में हुआ, या संयम-काल में हुआ? उत्तर: मुझे पाँच वर्ष के संयम-काल में अध्ययन-पूर्वक अनुभव हुआ।...
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Tuesday, October 25, 2011

सिंधु-बिंदु न्याय

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व्यापक-वस्तु बिंदु के रूप में अनुभव है, सिंधु के रूप में अभिव्यक्ति है। ज्ञान सत्ता का ही प्रतिरूप माना। जैसे सत्ता कहीं रुकता नहीं है, वैस...
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शंका का समाधान

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मुझसे रायपुर में शिक्षा से जुड़े १५० लोगों की एक बैठक में एक शंका व्यक्त किया गयी थी – “आपकी बात कहीं एक सम्प्रदाय तो नहीं बन जायेगी?” इसक...

प्रश्न और उत्तर

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प्रश्न में कौनसा उत्तर मिलता है भला? अभी तक प्रश्न पैदा करने को, शंका पैदा करने को ही विद्वता माना। केवल प्रश्न करके, शंका पैदा करके संतुष्...
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अनुभव प्रमाण की आवश्यकता

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मैं उस दिन तृप्त हो जाऊँगा जिस दिन मुझको पता चलेगा कि दस-बीस आदमी प्रमाणित हो गए। मुझको इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। यही चाहिए! उसी के लिए म...
Monday, October 24, 2011

मध्यस्थ-क्रिया का स्वरूप

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सत्ता किस वास्तविकता को व्यक्त करती है? सत्ता मध्यस्थ वस्तु है। वस्तु का मतलब है – जो वास्तविकताओं को व्यक्त करे। पारगामी, पारदर्शी, और व...

प्रभाव

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सत्ता का प्रभाव सर्वत्र बना रहता है, सत्ता विकृत नहीं होता। उसी तरह प्रत्येक वस्तु का प्रभाव है। किसी वस्तु का प्रभाव जितनी दूर तक है, उससे...
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