Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Tuesday, April 19, 2011

भक्ति

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आदर्शवाद में “भक्ति” को लेकर कहा गया – ईश्वर को रिझाने के अर्थ में भजन और सेवा करना भक्ति है। ईश्वर रहस्यमय रहे आया. यहाँ मानव-संचेतना वादी ...

अनुभव के लिए अड़चन

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हर व्यक्ति अपने तरह से जीना शुरू करता है। जीव-चेतना में सुविधा-संग्रह पूर्वक जीना शुरू करता है। उसको वह त्यागना नहीं चाहता है। सूक्ष्म रूप म...

मानव-चेतना

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“मानव-चेतना” एक शब्द है। इस शब्द का अर्थ है – ज्ञान। ज्ञान रासायनिक-भौतिक वस्तु नहीं है। जड़-चैतन्य वस्तु सत्ता में संपृक्त है. सत्ता व्यापक ...

विश्वास

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स्वयं में विश्वास न होने का प्रमाण है, हमारा अपने ही संतान पर विश्वास न हो पाना। अपनी संतान पर विश्वास होने के बाद ही गाँव-मोहल्ले में अन्य ...
1 comment:
Monday, April 18, 2011

अनुभव

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आज मकर-संक्रांति का दिन है. ऐसे शुभ वेला में आप हम सब मिले हैं. यह संयोग और निष्ठा की बात है. संयोग तो रहा ही. निष्ठा होने से हम यहाँ मिल...
Sunday, April 17, 2011

अध्ययन में मन लगना

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जीवन-ज्ञान के लिए आशा ही जिज्ञासा है. अध्ययन में मन लगता है तो अनुभव होता है. मन नहीं लगता है, तो पूरा ठीक से सुना भी या नहीं, यह भी कहा न...

अभिव्यक्ति सम्प्रेश्ना प्रकाशन

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सभी मोड-मुद्दे पर समाधान संपन्न होना अनुभव के बाद ही बनता है. उसके लिए जीने में (व्यवहार और कर्म) अभ्यास है. अभ्यास दो ही भागों में है – स...
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