Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Tuesday, June 30, 2009

अध्ययन की शुरुआत

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हर परस्परता के बीच जो हमारी आँखों से खाली-स्थली जैसा दिखता है, वह सत्ता ही है। यह खाली नहीं है - यह ऊर्जा है। यह ऊर्जा सभी वस्तुओं में पारगा...
Monday, June 29, 2009

मनोगति से सब कुछ नापा जाता है.

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मनोगति को किसी संख्या में नापा नहीं जा सकता। मनोगति से सब कुछ नापा जाता है। गति ही गति को नापता है। गति के बिना गति को कैसे नापा जाए? जीवन ग...
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प्रकृति में शून्याकर्षण प्रमाणित है.

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सत्ता में सम्पृक्तता वश हर वस्तु चुम्बकीय-बल संपन्न है। चुम्बकीय-बल सम्पन्नता वश वस्तुओं में परस्पर पहचान सिद्ध होती है। चुम्बकीय बल सम्पन्...
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संवेदना का मतलब

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संवेदना = पूर्णता के अर्थ में वेदना। यह संवेदना की परिभाषा बनी। संवेदनाओं में संतुष्टि मिलता नहीं है - इसी लिए वेदना। संवेदनाओं में पूर्णता ...
Sunday, June 28, 2009

साधना, समाधि, संयम

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यह एक संयोग की बात है - मेरी ही इच्छा, मेरी ही स्वीकृति, मेरी ही चर्चा, मेरा ही तर्क मुझको अमरकंटक तक ले आया। ऐसा मैं मानता हूँ। अमरकंटक उस ...

एक करुण-कथा

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मैंने कई बार आपके सामने "अनुसंधान" शब्द का प्रयोग किया है। मुझसे यहाँ पूछा जा रहा है - तुमको यह अनुसंधान करने की ज़रूरत कहाँ से आ ग...
Sunday, June 21, 2009

अभी तक की सोच का विकल्प

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मनुष्य-जाति के इतिहास में अभी तक जो भी प्रयास हुए, वे उसको समझदारी के घाट पर पहुंचाने में असमर्थ रहे। पहले आदर्शवाद ने "आस्था" या ...
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