Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Monday, April 27, 2009

अनुसन्धान का लोकव्यापीकरण

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मानव का पुण्य रहा तभी यह अनुसंधान सफल हो पाया। इस बात को लेकर मैं बहुत भरोसा करता हूँ, कि आदमी इस प्रस्ताव को स्वीकारेगा। मुझे इस प्रस्ताव...

मानव भाषा का स्वरूप

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भाषा का प्रयोजन है - एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अपनी बात पहुंचाना। भाषा के तीन स्वरूप हम देखते हैं - (१) शरीर-विन्यास से भाषा, (२) लिपि...

जीवन, मेधस, और स्मृति

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जीवन एक परमाणु है। उसमें ६१ क्रियाकलाप हैं - जो परावर्तन और प्रत्यावर्तन विधि से १२२ क्रियाएं हैं। जीवन का गति मनोवेग के बराबर है। मनोगति...
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अनुभव

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अनुभव व्यापक में सम्पृक्तता का होता है। अकेले व्यापक नहीं है। अनुभव करने वाला नहीं हो तो व्यापक कहाँ/किसको समझ में आता है? अनुभव करने वाल...
Saturday, April 25, 2009

अध्ययन में एकाग्रता

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अध्ययन में एकाग्रता की आवश्यकता है। एकाग्रता के लिए अध्ययन का लक्ष्य निश्चित करना आवश्यक है। बिना अध्ययन का लक्ष्य निश्चित हुए, एकाग्रता न...

संबंधों की पहचान

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संबंधों की पहचान होने पर ही संबंधों में न्याय पूर्वक जीने की स्थिति बनती है। संबंधों में ही जीना होता है। संबंधों को छोड़ कर जीने की कोई स्...
Thursday, April 23, 2009

सहअस्तित्व में अनुभव ही परम-प्रमाण है.

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आदर्शवाद ने शब्द को प्रमाण माना। उसके बाद आप्त-वाक्य को प्रमाण माना। उसी के अन्तरंग प्रत्यक्ष, अनुमान, और आगम को प्रमाण माना। अंततोगत्वा...
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