Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Tuesday, August 19, 2008

नियम

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मध्यस्थ-दर्शन के अनुसार: नियति-विधि ही नियम है। सम्पूर्ण नियम अस्तित्व में हैं ही। नियम से ही अस्तित्व में पदार्थ-अवस्था से प्राण-अवस्था, प...
Sunday, August 17, 2008

"जीने" के आंशिक भाग में "करना" है.

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आज की स्थिति में आदमी के पास "करने" का load ज्यादा है। "सोचने" का load उससे कम है। "समझने" का load शून्य है। य...

श्रुति, स्मृति, अध्ययन, प्रमाण

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श्रुति-स्मृति का मतलब है - भाषा को सुनना और बोल कर सुनाना। यहाँ तक मनुष्य-जाति पहुँच गया था। अध्ययन, वास्तविकताओं को लेकर पारंगत होना, और प्...
Saturday, August 16, 2008

अध्ययन-क्रम में पड़ाव

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प्रश्न: आप कहते हैं - मनुष्य जीने में दो ही स्थितियों में हो सकता है। या तो भ्रम में जीता है, या जागृति में जीता है। भ्रम में जीवन की ४.५ क...
Thursday, August 14, 2008

भाषा से ज्ञान तक

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ध्वनि के एक तरीके को हम भाषा कह रहे हैं। इन्द्रियों के साथ शब्द तैयार होता है। शब्द अंततोगत्वा भाषा के नाम से आया। भाषा है - भासना। शब्द के...
3 comments:
Wednesday, August 13, 2008

कैसे सुने?

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जो कहा जा रहा है, उतना ही सुने - उसके साथ मिलावट नहीं किया जाए। मिलावट करने से हम रुक जाते हैं। अनसुनी करने से हम रुक जाते हैं। अनदेखी करन...

विचार पहले, आचरण उसके बाद में

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विगत में (आदर्शवाद ने) बताया - आचरण पहले, विचार बाद में। आचरण के नियम बताये - यह करो, यह मत करो। वह सब रूढियों में परिवर्तित हो गया। जबकि...
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