Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Wednesday, March 26, 2008

साक्षात्कार

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(१) अध्ययन मूलक विधि से हम साक्षात्कार तक पहुँचते हैं। (२) परिभाषा-विधि से हम शब्द के अर्थ को अपनी कल्पना में लाते हैं। (३) उस कल्पना के आधा...
Monday, March 17, 2008

ज्ञानावस्था की mutiplication theory

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दर्शन का मतलब है "जीना" = "मैं जैसा हूँ"। मेरा जीना आपके लिए दर्शन है। आपका जीना मेरे लिए दर्शन है। मेरा आचरण मेरे लिए...
Monday, March 10, 2008

साधन और साध्य

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कीचड में खडा आदमी को पता लग गया कि - यह कीचड है। इससे बाहर निकलना है, यह पता लग गया। बाहर निकलने का रास्ता अध्ययन है - यह पता लग गया। विच...

प्रकृति में पढ़ा का क्या अर्थ है?

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आप जो कहते हैं कि आपने समाधि-संयम पूर्वक प्रकृति में पढ़ा - उसका क्या अर्थ है? प्रकृति अपने हर पन्ने को खोला। जैसा प्रकृति है - वैसा हमार...
1 comment:
Monday, February 18, 2008

सम्प्रेष्णा का गुरु मंत्र

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मानव का मन तीन दिशाओं में एक साथ काम करता है। मन जो तीन दिशाओं में दौड़ता है - उसको कल्पना भी कह सकते हैं, मन की गति भी कह सकते हैं। चयन ...
Thursday, February 14, 2008

प्रमाण के साथ ही समझ पूरा होता है।

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भ्रमित स्थिति में भी आप सत्य की अपेक्षा करते रहे। सत्य की अपेक्षा आप में समाई रही। उसके बाद आपको सूचना मिली की यह अपेक्षा जीवन में है। ...

मनुष्य की कल्पनाशीलता का तृप्ति बिन्दु सह-अस्तित्व में ही है।

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* सत्ता में संपृक्त प्रकृति का बोध बुद्धि में ही होता है। यह मन में नहीं होता। चित्त में चित्रित नहीं होता। बुद्धि में इसका बोध होने पर मन...
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