Jeevan Vidya - A Study in Coexistence (जीवन विद्या - सह-अस्तित्व में अध्ययन)

This blog is for Study of Madhyasth Darshan (Jeevan Vidya) propounded by Shree A. Nagraj, Amarkantak. (श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ-दर्शन सह-अस्तित्व-वाद के अध्ययन के लिए)

Tuesday, January 22, 2008

चित्रण और बोध

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(अनुभव से पहले) चित्त में जो चित्रण होता है - वह अनुभव मूलक विधि से प्रमाणित नहीं होता। संवेदना के रुप में ही व्यक्त होता है। अध्ययन पूर्...

अर्थ अस्तित्व में वस्तु है।

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सुनना भाषा है। समझना अर्थ है। अर्थ अस्तित्व में वस्तु है। वस्तु समझ में आता है - तो हम अर्थ समझते हैं। समझ जो है - वह अनुभव है। शब्द अ...

अर्थ को समझना हर व्यक्ति के बलबूते का है।

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जीवन में स्वयम से कोई चीज छुपा नहीं है। शरीर को जब तक जीवन माने रहते हैं, जीवन छुपा ही रहता है। जीवन को जीवन मानने की आवश्यकता है। ऐसा होने...
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