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Sunday, June 19, 2016

अध्यात्म अध्ययन अनुभव प्रमाण


सत्ता में भीगे होने का अनुभव होकर अनुभव मूलक प्रमाण बोध हो जाना ही धारणा है, यही अध्यात्म है, यही ज्ञान है, यही धर्म है, यही सुख का स्वरूप है.

अन्तर्नियामन विधि का अर्थ है - मन विचार के अनुरूप हो जाए, विचार चित्त के अनुरूप हो जाए, चित्त बुद्धि के अनुरूप हो जाए, और बुद्धि आत्मा के अनुरूप हो जाए.  इस विधि से ध्यान का अर्थ स्पष्ट होता है.  जीवन की दसों क्रियाएं क्रियाशील होने के लिए यह अन्तर्नियोजन आवश्यक है.

अनुभव के साक्षी में विद्यार्थी अध्ययन करता है, अनुभव की रोशनी में अध्यापक अध्ययन कराता है.

अनुभव प्रमाण ही उपाय है मानव परंपरा के लिए.  यही उपकार है.  उपाय पूर्वक अनुभव होता है, जिससे धारणा होती है.

- श्रद्धेय नागराज जी के साथ संवाद पर आधारित (अगस्त २००७, अमरकंटक)

स्पष्टीकरण - भाग 2

स्पष्टीकरण - भाग १

Friday, May 13, 2016

जीवन मूल्य

"जीवन मूल्य के अर्थ में व्यवहार मूल्यों का प्रायोजित होना ही सफलता है.  जीवन मूल्यों के अर्थ में समाज मूल्यों का आचरण, निर्वाह, संरक्षण, संवर्धन और प्रोत्साहन ही न्याय सुलभता है." - श्री ए नागराज


Wednesday, May 11, 2016

बाध्यता, जिज्ञासा और विवशता

"मानवीय गुणों के लिए मनुष्य बाध्य है.  दिव्य गुणों के लिए जिज्ञासु एवं अमानवीय गुणों के लिए विवश है.  बाध्यता कर्त्तव्य और अधिकार में, जिज्ञासा अभ्युदय में, विवशता दास्यता में ख्यात है." - श्री ए नागराज