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Monday, April 11, 2016

जागृत मानव के अनुभव की वस्तु

"जागृत मानव (दृष्टा पद) =

  • व्यापक वस्तु में सम्पूर्ण एक एक वस्तुएं अविभाज्य रूप में होने का अनुभव 
  • व्यापक वस्तु में सम्पूर्ण वस्तु स्वयंस्फूर्त क्रियाशील होने का अनुभव 
  • व्यापक वस्तु में सम्पूर्ण एक एक वस्तुएं ऊर्जा संपन्न, बल संपन्न, नियंत्रित, नित्य, निरन्तर होने का अनुभव 
  • सभी अवस्था व पद पूरक होने का अनुभव 
  • विकास क्रम के अनन्तर विकास स्वरूप में चैतन्य वस्तु (जीवन) का अनुभव 
  • जीवन क्रिया रूप में, लक्ष्य रूप में समान होने का अनुभव 
  • सर्व मानव में शुभाकांक्षा, शुभ प्रवृत्तियाँ होने का अनुभव" - श्री ए नागराज 

"Awakened Human Being (The Seer) has: -


  • Realization that entire units of nature have inseparable presence in the pervasive reality (Space).
  • Realization that entire units are active in a self inspired way in the pervasive reality.
  • Realization that entire units are energized, forceful, restrained, eternal, and have continuous presence in the pervasive reality.
  • Realization that there is complementariness in all orders and states of nature.
  • Realization of conscious reality (jeevan) as development, upon development progression.
  • Realization that every jeevan's activities and goal is the same.
  • Realization that all human beings basically have desire for good to happen and have good intentions." - Shree A. Nagraj.

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