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Monday, February 15, 2016

चारों अवस्थाओं के साथ सामरस्यता

"सार्वभौम व्यवस्था में चारों अवस्थाओं के साथ सामरस्यता होती है.  धरती के बिना आदमी का जीना बनता नहीं है.  वनस्पतियों के बिना आदमी का जीना बनता नहीं है.  जीवों के बिना आदमी का जीना बनता नहीं है.  मानव के बिना मानव का जीना बनता नहीं है.  इस बात को ध्यान में लाया जाए तो यह सोचना बनता है कि इनके साथ कैसे जिया जाए?  धरती को स्वस्थ बनाये रखते हुए धरती के साथ जीना, हवा के साथ हवा की पवित्रता बनाये रखते हुए जिया जाए, पानी के साथ पानी  पवित्रता बनाये रखते हुए जिया जाए.  वनस्पतियों के साथ उनकी परंपरा को बनाये रखते हुए जिया जाए.  जीवों के साथ उनकी परंपरा को बनाये रखते हुए जिया जाए.  मानव के साथ न्याय पूर्वक नियंत्रित रहते हुए जीना बनता है.  इसको अच्छी तरह समझने की ज़रुरत है और इस अर्हता को प्राप्त करना ही मानव लक्ष्य है.  इसी के लिए अध्ययन है." - श्री ए नागराज

"The Universal Order has Harmony in all four Orders of Nature.  Human life is not possible without this Earth.  Human life is not possible without vegetation.  Human life is not possible without animals.  Human life is not possible without other humans.  If we consider this inter-dependence, we have to now think on how human being should live with these?

Living with Earth is by assuring continuity of Earth's health.  Living with Air is by assuring continuity of air purity.  Living with water is by assuring continuity of water's purity.  Living with vegetation is by assuring continuity of their kinds.   Living with animals is by assuring continuity of their species.  Living with human beings is by being restrained with Justice.  This needs to be understood thoroughly, and accomplishment of this wisdom itself is human goal.  That is the only Purpose of this Study."  - Shree A. Nagraj

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